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महंगाई: अप्रैल से पहले नहीं कम होंगे खाद्य तेलों के दाम

नई दिल्ली । देश में सरसों के उत्पादन में बढ़ोतरी के अनुमान के बावजूद खाद्य तेल की महंगाई से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की गुंजाइश नहीं दिख रही है। खाने के तमाम तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। तेल व तिलहनों की वैश्विक आपूर्ति कम होने के कारण कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। सबसे सस्ता कच्चा पाम तेल का भाव बीते करीब 10 महीने में 89 फीसदी उछला है। पाम तेल के दाम में इजाफा होने से खाने के अन्य तेल के दाम में भी जोरदार उछाल आया है। जानकारों का कहना है कि सरसों की नई फसल आने के बाद ही राहत मिलेगी।

वायदा बाजार पर भाव उछला-
वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर क्रूड पाम तेल का मार्च वायदा 1,072 रुपए प्रति 10 किलो तक उछला, जो कि एक साल के निचले स्तर से 89त्न तेज है। 2020 में सीपीओ का वायदा भाव 567.30 रुपए प्रति 10 किलो तक टूटा था। वहीं हाजिर में पामोलीन आरबीडी का थोक भाव 68 रुपए किलो था, जो कि बढ़कर 116 रुपए किलो हो गया। सोया तेल का भाव 118 रुपए और सूर्यमुखी का तेल 157 रुपए प्रति किलो है।

जल्द राहत के आसार कम-
देश में इस समय कच्ची घानी सरसों तेल का थोक भाव 125 रुपए प्रति किलो चल रहा है। अप्रेल से पहले खाने के तेल की महंगाई पर लगाम लगने के आसार कम हैं। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन दाविश जैन ने बताया कि खाद्य तेल की कीमतें काफी ऊंची हो गई हैं, जिससे आयात महंगा हो गया है। जब तक सरसों की नई फसल बाजार में नहीं उतरती है, तब तक दाम में गिरावट के आसार कम हैं।

इस कारण बढ़ रहे तेल के दाम-
सॉल्वेंट एक्स्ट्रैटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक डॉ. बीवी मेहता का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल के दाम में लगातार तेजी देखी जा रही हैं, क्योंकि आपूर्ति में कमी से तेजी को सपोर्ट मिल रहा है। सूर्यमुखी का वैश्विक उत्पादन निचले स्तर पर है। रेपसीड का उत्पादन कम है। मलेशिया में पाम तेल का उत्पादन जितना बढऩा चाहिए, उतना नहीं बढ़ा। अर्जेंटीना और ब्राजील में नई फसल आने में विलंब हो गया है। भारत में भी सरसों की फसल आने में 20 दिन की देरी हो गई है।



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